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National News Desk
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विचार: शोरूम एवं प्रबंधन का बेमिसाल संगम है दीपोत्सव

Amar Ujala National HindiBy हरि शंकर मिश्र
31 Oct 2026
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AI Synopsis & Key Briefing

2017 में पहले दीपोत्सव में इक्यावन हजार दिए जले थे। इसके बाद वार्षिक वर्ष में यह संख्या बढ़ गई और विश्व कीर्तिमान बनाने के साथ-साथ लोगों के मन में रचती-बसती चली गई।

Key Highlights & Official Takeaways
  • ✓2017 में पहले दीपोत्सव में इक्यावन हजार दिए जले थे।
  • ✓इस बार का लक्ष्य तीस लाख दीयों का है।
  • ✓जिस नगरी में रामराज की स्मृति है, वहां जल वाला हर दीपक उसी आदर्श का प्रतीक है।
  • ✓इसे देखने से यह कहा जा सकता है कि जहां आस्था को व्यवस्था की साधना की व्यवस्था है, वहां रामराज की कल्पना नहीं है, कार्यपद्धति बन गई है, कार्यशैली बन गई है।
Comprehensive News & Policy Report

दीपोत्सव में राम की पैड़ी पर जले दीप के बीच लेजर शो का दृश्य-फाइल फोटो लिंक कॉपी किया गया दीपोत्सव में राम की पैड़ी पर जले दीप के बीच लेजर शो का दृश्य-फाइल फोटो अयोध्या में मनाए जाने वाले का यह 10वां संस्करण है। इस बार का लक्ष्य तीस लाख दीयों का है।

जिस नगरी में रामराज की स्मृति है, वहां जल वाला हर दीपक उसी आदर्श का प्रतीक है। इसे देखने से यह कहा जा सकता है कि जहां आस्था को व्यवस्था की साधना की व्यवस्था है, वहां रामराज की कल्पना नहीं है, कार्यपद्धति बन गई है, कार्यशैली बन गई है।

2017 में पहले दीपोत्सव में इक्यावन हजार दिए जले थे। इसके बाद वार्षिक वर्ष में यह संख्या बढ़ गई और विश्व कीर्तिमान बनाने के साथ-साथ लोगों के मन में रचती-बसती चली गई। सरयू तट और राम की पैड़ी में जलते दीपों की छवि बसाने के लिए हर साल लाखों लोग यहां आते हैं।

दीपों का विशाल रेखांकन संयोग नहीं है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राम के प्रति आस्था और उनके कुशल नेतृत्व का परिणाम है। यहां यूनिवर्सल एसोसिएट और कुशल प्रबंधन का जीवंत रूप देखा जा सकता है। अन्यथा रामराज की सबसे पहली निर्माता ही सुव्यवस्था है।

रामकथा में अयोध्या का वर्णन ऐसे नगर के रूप में मिलता है जहां पेज निश्चिंत है, क्योंकि राज्य अपना दायित्व जानता है। इसी आइटम पर दीपोत्सव के प्रेमियों को देखें। इस बार दीयों की व्यवस्था छप्पन घाटों पर होगी, जबकि पहले यह पचपन घाटों तक सीमित थी।

डेयों को एक समान सिद्धांत में डेको के लिए ब्लॉक आधारित लेआउट को जाना जाता है और मार्किंग का काम तीन-चार दिन में पूरा करने का लक्ष्य है। तीस लाख दिए किसी भी मैदान में नहीं रुकें जगह। उन्हें सीढ़ी-दर-सीढ़ी, पंक्ति-दर-पंक्ति इस तरह से रखा जाता है कि साध्य को वे एक अखंड ज्योति-रेखा बन जाते हैं।

यह ज्यामिति, समष्टि और समय-प्रबंधन की साधना है। इस पूरे कार्यक्रम में दूरदर्शिता का एक सबल पक्ष है। लक्ष्य तीस लाख का है, पर टैनटिस लाख दिए गए हैं, ताकि ट्रांसपोर्ट में बेचने वाले दीयों की भरपाई हो सके। यह संकट के बाद उसे बिजली वाली नहीं, संकट से पहले उसका हिसाब लेने वाली सोच है।

रामराज का एक सूत्र यही है कि सर्वोच्च शासन, जो प्रजा को पीछे आने से पहले उसकी चिंता कर ले। सुशासन की पहचान अक्सर ऐसे ही अदृश्य निर्णयों में होती है, जिनके कारण कुछ समानता नहीं होती। रामराज की अलग ही फैक्ट्री है। राम का राज्य था, जिसमें निषादराज, शबरी, वानर और रीछ सभी अपने-अपने घटक थे।

इस इवेंट में भी वही भाव दिखता है। तीस डिग्री सेल्सियस, चालीस डिग्री सेल्सियस और यूनिवर्सिटी परिसर से लगभग पैंतीस स्वयंसेवक स्टाफ होगा। उन्हें घाटवार जिम्मेदारियां दी गई, प्रशिक्षण के साथ पहचान पत्र मिलेगा। विश्वविद्यालय और प्रशासन जिला समूह संयोजन, घाट प्रबंधन, स्वयंसेवकों के आर्किटेक्चर और सुरक्षा मानकों की व्यवस्था बनाए रखे जा रहे हैं।

जो आज घाट पर दीपक सजाता है, वह इस उत्सव का दर्शक नहीं, रचयिता है। शिक्षा संस्थान, प्रशासन और समाज का यह त्रिकोण बताता है कि यहां शासन ऊपर से ऑर्डर वाली मशीन नहीं, पब्लिक साथ लेकर चलने वाला धारक है। नई पीढ़ी के हाथों में दीपक रखना, उन्हें यह सिखाया कि समाज की रोशनी सबके साझे प्रयास से जलती है, रामराज की सबसे सुंदर शिक्षा है।

इसके पीछे आध्यात्मिक भाव दीपक की लौ ही है। दीपावली का मूल संदेश ब्लैकआउट पर लाइट की विजय है, उस प्रार्थना का साकार रूप जिसमें लीडर ब्लैकबोर्ड से ज्योति की ओर ले जाने की याचना शामिल है। अयोध्या में यह भाव अलग-अलग संस्करणों का है।

वह वहीं भूमि है जहां चौदह वर्ष के वनवास के बाद राम के अवशेष थे और नगरवासियों ने घर-घर दीप जलाकर अपना हर्ष प्रकट किया था। उस दिन का उजाला केवल राजा के आगमन का उत्सव नहीं था। उनका इस विश्वास का उत्सव था कि अब धर्म, न्याय और निषेध का शासन लौटेगा।

सौते की प्रतीक्षा के बाद रामलला जब अपने भव्य मंदिर में विराजे, तब उनकी स्मृति जीवित वर्तमान में बन गई। तुलसीदास ने रामराज का जो चित्र खींचा है, वहां दैहिक, दैविक और भौतिक ताप किसी को नहीं सताते। वह आज भी आदर्श है और उच्चस्तरीय पुरातात्विक व्यवस्था का पैमाना भी है।

(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। अमर उजाला के लिए दी गई जानकारी और निष्कर्ष में दिए गए लेख में लेखक हरि शंकर मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार नहीं हैं।)

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Official Notice Specification
Issuing AuthorityAmar Ujala National Hindi
Topic CategoryINDIA
JurisdictionAll India / National
Publication Date31 October 2026
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