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बदली राई दुकान की संस्कृति: बाजार में स्वदेशी बौद्ध धर्म

Amar Ujala National HindiBy Amar Ujala National Hindi
5 Nov 2026
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AI Synopsis & Key Briefing

बदली हुई दुकान की संस्कृति: बाजार में स्वदेशी स्वदेशी उत्पादों-चीनी-सामानों-भारतीय-अर्थव्यवस्था के लिए दिवाली-त्योहार-बाजार-मुखर

Key Highlights & Official Takeaways
  • ✓बदली हुई दुकान की संस्कृति: बाजार में स्वदेशी स्वदेशी उत्पादों-चीनी-सामानों-भारतीय-अर्थव्यवस्था के लिए दिवाली-त्योहार-बाजार-मुखर
  • ✓देश में त्योहारी बाजार में स्थानीय एवं स्वदेशी देवी-देवताओं की बिक्री में भारी उछाल देखा जा रहा है।
  • ✓पिछले कुछ वर्षों से प्रधानमंत्री द्वारा 'वोकल फॉर लोकल' का कॉन्स्टेंट पोस्टल, राजनेताओं के उपभोक्ता व्यवहार पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव डाला जा रहा है।
  • ✓'फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (कैट) के अनुसार, इस बार नवरात्रि से लेकर करीब सात लाख करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है।
Comprehensive News & Policy Report

देश में त्योहारी बाजार में स्थानीय एवं स्वदेशी देवी-देवताओं की बिक्री में भारी उछाल देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से प्रधानमंत्री द्वारा 'वोकल फॉर लोकल' का कॉन्स्टेंट पोस्टल, राजनेताओं के उपभोक्ता व्यवहार पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव डाला जा रहा है।

परिणामस्वरूप, हर बदलते त्योहार के साथ भारतीय प्लास्टर में स्थानीय प्लास्टर, हस्तशिल्प और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम कारीगर (एमएसएमई) द्वारा निर्मित सामान की मांग और बिक्री में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। 'फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (कैट) के अनुसार, इस बार नवरात्रि से लेकर करीब सात लाख करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है।

वहीं, विभिन्न शीर्ष आर्थिक आक्षेपों की रिपोर्ट के अनुसार, इस त्योहारी चक्र में भारत का कुल व्यापारिक कारोबार पिछले साल की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस त्योहारी सीजन की सबसे सुखद तस्वीर यह है कि भारतीय बाजारों में चीनी प्लास्टर का अनुपात तेजी से बढ़ा है और स्वदेशी खाद्य पदार्थों की आपूर्ति में वृद्धि हुई है।

class='for_premium_user_remove delete_ad_class mt-10 pwa_for_remove'> अगर हम एक दशक पूर्व की स्थिति देखें, तो अमीर पर अमीर, आकर्षक, लेकिन घटिया क्वालिटी वाले चीनी अज़ीम का 60 से 70 प्रतिशत तक एकछत्र राज करता था। चीन से बड़े पैमाने पर वाले ने भारत के पारंपरिक शिल्पों, कुम्हारों, बुनेकरों और लघुचित्रों को हाशिये पर दोहराया था।

साथ ही, देश की शान विदेशी मुद्रा असाधारण चली गई थी। भारतीय उपभोक्ता अब चीनी परमाणु के बजाय मूल रूप से स्वदेशी, प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल चॉकलेट को तरजीह दे रहे हैं। इस बदलाव से भारत को त्योहारी सीजन के दौरान अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत करने में सफलता मिल रही है।

जब कोई नागरिक स्थानीय उत्पाद खरीदता है, तो उसकी गाधी आय का सीधा लाभ विदेशी बाजार में जाने के बजाय भारत के छोटे कलाकारों, कुम्हारों, बुंडकरों, हस्तशिल्पियों और महिला स्वयं सहायता समुदाय तक पहुंच जाता है। इससे धन का न्यायसंगत पुनर्वितरण होता है और ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्थाएं भी मजबूत होती हैं।

निश्चित रूप से पिछले एक दशक में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसीटी) ने अपने अभियानों के माध्यम से ग्रामीण शिल्पकारों को बढ़ावा दिया है। 'ग्रामोद्योग विकास योजना' और 'कुम्हार नोटबंदी योजना' के तहत यूनेस्को में हजारों कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक और उन्नत टूलकिट दिए गए हैं, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता तीन से चार गुना बढ़ जाती है।

वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों के कुल उत्पादन में लगभग 320 प्रतिशत और बिक्री में 400 प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। स्थानीय वाद्ययंत्रों का यह प्रोत्साहन केवल मिट्टी के दीयों या हस्तशिल्प तक सीमित नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान रचे हैं।

केंद्र की 'मेक इन इंडिया' और 'प्रो लिंक्ड इंसेंटिव' (पीएलआई) सदस्यता योजना से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरों के नए लक्ष्य स्थापित किए गए हैं। इन स्वदेशी निर्माण इकाइयों और एएमएसएमई इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स ने इस साल भारत के त्योहारी बाजार की करीब 80 प्रतिशत से अधिक प्रकाश व्यवस्था, सजावटी लड़कियों और गृह-सज्जा (होम ऑटोमेशन) की मांग को स्वदेशी उत्पादों से पूरा किया है।

जिन सजावटी लाइटों के लिए भारत को कभी भी मंजूरी नहीं दी गई थी, आज वे चीन के उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद और मोटरसाइकिलें भारत में ही निर्मित हो रहे हैं। विश्वाशों और बैस्ट के दबाव को तोड़ कर भारतीय उपभोक्ता गौरव और विश्वास के साथ स्वदेशी लक्ष्मी को अपना रहे हैं।

यह स्पष्ट संदेश है कि आज के सलाहकार भारतीय नागरिक की यात्रा में 'राष्ट्रहित' सर्वोपरि हैं। 'वोकल फॉर लोकल' का यह अभियान अब सिर्फ सरकारी नारा न रहकर एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। class='for_premium_user_remove delete_ad_class mt-10 pwa_for_remove'>उम्मीद है कि स्थानीय आदर्शों की यह भारी मांग वाले देशों में लाखों नए रोजगार के अवसरों की वृद्धि, ग्रामीण-शहरी आय की कमी को कम करने और देश को विकसित भारत बनाने की राह पर आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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Official Notice Specification
Issuing AuthorityAmar Ujala National Hindi
Topic CategoryBUSINESS
JurisdictionAll India / National
Publication Date5 November 2026
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Official Source Attribution: Amar Ujala National Hindi
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