एक्सप्लेनर: दिवाली से पहले कितनी खराब दिल्ली-एनसीआर की हवा, वजह क्या; कब तक झेलने पड़ सकते हैं ऐसे हालात?
दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंची। पराली के धुएं और धीमी हवाओं के बीच GRAP-3 लागू। जानें प्रदूषण के मुख्य कारण, पाबंदियां और दिवाली के बाद का पूर्वानुमान।
- ✓दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंची।
- ✓दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब।
- ✓- फोटो : अमर उजाला Link Copied दिल्ली-एनसीआर में नवंबर की शुरुआत में ही लोगों की सांसों पर संकट खड़ा हो गया है।
- ✓आलम यह है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में इस वक्त भारत की राजधानी दिल्ली सबसे ऊपर है।
दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब। - फोटो : अमर उजाला Link Copied दिल्ली-एनसीआर में नवंबर की शुरुआत में ही लोगों की सांसों पर संकट खड़ा हो गया है। आलम यह है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में इस वक्त भारत की राजधानी दिल्ली सबसे ऊपर है।
यह स्थिति दिल्ली में दिवाली से पहले ही आ गई है, जिसके चलते राजधानी और इसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रेडेड एक्शन रिस्पॉन्स प्लान (ग्रैप) का तीसरा चरण लागू कर दिया गया है। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर के पूरे क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही और निर्माण कार्यों पर अलग-अलग तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं।
हालांकि, इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर दिल्ली-एनसीआर में दिवाली से पहले वायु गुणवत्ता कैसी है? दुनिया के अलग-अलग शहरों के मुकाबले भारत में एक्यूआई की स्थिति क्या है? अक्तूबर के अंतिम दिनों में हवा साफ रहने के बाद नवंबर के पहले हफ्ते में ही पूरे क्षेत्र की हवा खराब कैसे हो गई?
अगर यह स्थितियां अभी हैं तो दिवाली के बाद हालात कैसे रहने का अनुमान है? सरकार इस स्थिति को संभालने के लिए क्या कर रही है? आइये जानते हैं... 7 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर में समग्र वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और वायु गुणवत्ता निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे क्षेत्र में हवा की स्थिति गंभीर होने का अनुमान है। ये भी पढ़ें: प्रदूषण पर दोहरी सख्ती: दिल्ली में दूसरे राज्यों के इन वाहनों की एंट्री पर लगी रोक, 250 कर्मी बॉर्डर पर तैनात यानी बीते दो दिन में दिल्ली की हवा बेहद खराब की श्रेणी में रही और सुधार नहीं देखा गया।
इतना ही नहीं दिल्ली के 59 निगरानी स्टेशनों में से 18 स्टेशनों पर एक्यूआई 'गंभीर' श्रेणी (401–500) में दर्ज किया गया। दुनिया के अलग-अलग शहरों के मुकाबले भारत में एक्यूआई की स्थिति क्या है? स्विस वायु गुणवत्ता निगरानी समूह आईक्यूएयर (IQAir) की लाइव रैंकिंग के मुताबिक, शनिवार की सुबह दिल्ली दुनिया के प्रमुख शहरों में पहले स्थान पर रहा।
यानी यह सबसे प्रदूषित शहरों में टॉप पर था। अमेरिकी वायु गुणवत्ता सूचकांक के पैमाने पर सुबह 10:35 बजे दिल्ली का एक्यूआई 581 दर्ज किया गया। वहीं, पड़ोसी देश पाकिस्तान का लाहौर 285 एक्यूआई पर था, जिसका मतलब है कि दिल्ली का प्रदूषण स्तर लाहौर की तुलना में लगभग दोगुना था।
इसके अलावा दिल्ली के पड़ोसी जिलों में गुरुग्राम (एक्यूआई 595) और ग्रेटर नोएडा (एक्यूआई 430) सबसे ज्यादा प्रदूषित रहे। यहां सुबह हवा की खराब गुणवत्ता में दोपहर आते-आते थोड़ा सुधार हुआ। हालांकि, आईक्यूएयर की यह रैंकिंग अमेरिकी एक्यूआई पद्धति पर आधारित है, जो भारत के आधिकारिक पैमाने से सीधे नहीं जुड़ी है।
भारतीय केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अपने पैमाने पर उसी समय दिल्ली का एक्यूआई 363 यानी 'बेहद खराब' श्रेणी में दर्ज किया गया था। अक्तूबर के अंत में आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तट से टकराए चक्रवात 'अर्नब' की वजह से जो मौसमी स्थितियां पैदा हुईं, उनका असर उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत तक देखा गया था।
दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाएं चली थीं और बारिश हुई थी। इस मौसमी बदलाव ने दिल्ली-एनसीआर में जमा प्रदूषकों को उड़ाकर हवा को कुछ समय के लिए साफ कर दिया था। लेकिन नवंबर की शुरुआत में जैसे ही इस चक्रवात का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हुआ, राहत का यह दौर भी खत्म हो गया।
चक्रवाती तूफान अर्नब के शांत होते ही हवाओं का रुख फिर से उत्तर-पश्चिम की ओर हो गया। यह दिशा पंजाब, हरियाणा और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों से आने वाले धुएं को सीधे दिल्ली-एनसीआर की ओर ले आई। अक्तूबर में हुई बारिश के कारण किसान खेतों में धान की कटाई नहीं कर पाए थे।
मौसम साफ होते ही किसानों ने कटाई का काम तेज कर दिया, जिससे पराली जलाने की घटनाओं में अचानक भारी उछाल आया। पंजाब में 31 अक्तूबर को एक ही दिन में सीजन के सबसे ज्यादा 194 पराली जलाने के मामले दर्ज हुए और नवंबर के पहले हफ्ते में खेतों में आग की संख्या तेजी से बढ़ी।
इससे दिल्ली-एनसीआर बुरी तरह प्रभावित हुए। नवंबर की शुरुआत होते ही हवा की औसत गति घटकर 10 किमी/घंटे से नीचे (और कई समय लगभग शून्य) आ गई। इसके साथ ही वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे गिर गया, जिससे हवा में मौजूद प्रदूषकों का छंटना और दूर बिखरना बंद हो गया।
मौसम में ठंडक बढ़ने और न्यूनतम तापमान गिरकर 16.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से जैसे-जैसे धुंध की स्थिति बनने लगी, वैसे ही ठंडी और भारी हवा ने पराली के धुएं, वाहनों के उत्सर्जन, निर्माण धूल और औद्योगिक धुएं को जमीन की निचली सतह के करीब ही कैद कर लिया।
इन स्थितियों के मद्देनजर दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हुई और दिवाली से पहले ही एक्यूआई 'बहुत खराब' से गंभीर की श्रेणी तक पहुंच चुका है।
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| Issuing Authority | Amar Ujala National Hindi |
|---|---|
| Topic Category | STATES |
| Jurisdiction | All India / National |
| Publication Date | 7 November 2026 |