साइबर क्राइम: सीआरपीएफ में कौन है सुधीर सर? जिसके नाम से महिला कर्मियों को आ रहीं ऐसी कॉल
साइबर क्राइम: सीआरपीएफ में कौन है सुधीर सर? जिसके नाम से महिला कर्मियों को आ रहीं ऐसी कॉल , Cybercrime: Who is Sudhir Sir in CRPF, name being used in calls made to female personnel
- ✓साइबर क्राइम: सीआरपीएफ में कौन है सुधीर सर?
- ✓देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में अज्ञात नंबरों से जवानों के मोबाइल फोन पर कॉल आ रही हैं।
- ✓पहले ऐसी कॉल जवानों के पास आ रही थी, अब महिला कार्मिकों के फोन पर भी आने लगी हैं।
- ✓बल की 88 वीं बटालियन (महिला) में इस तरह के फोन आ रहे हैं।
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में अज्ञात नंबरों से जवानों के मोबाइल फोन पर कॉल आ रही हैं। पहले ऐसी कॉल जवानों के पास आ रही थी, अब महिला कार्मिकों के फोन पर भी आने लगी हैं। बल की 88 वीं बटालियन (महिला) में इस तरह के फोन आ रहे हैं।
खास बात है कि इस कॉल को करने वाला व्यक्ति 'सुधीर सर' का नाम लेता है। वह कहता है कि 'सुधीर सर' ने कहा है कि फलां फोन नंबर को कंपनी के 'व्हाट्सऐप ग्रुप' में शामिल करें। सर चाहते हैं कि इतने पैसे ट्रांसफर कर दिए जाएं। डी 88 कंपनी की एक महिला कार्मिक के फोन पर जो कॉल आई, उसमें 'सुधीर सर' को डिप्टी कमांडेंट बताया गया तो दूसरी कार्मिक के पास आई कॉल में 'सहायक कमांडेंट' बता दिया गया।
विज्ञापन अनजान कॉल, लिंक व ओटीपी के प्रति सतर्क रहें सीआरपीएफ मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात स्वीकार की है कि बल के कार्मिकों के फोन पर अज्ञात नंबरों से कॉल आ रही हैं। ऐसी कॉल करने वाले व्यक्ति 'साइबर अपराध' में शामिल होते हैं।
वे जवानों के साथ ठगी करने का प्रयास करते हैं। कभी खुद को बैंक का कर्मचारी बताते हैं तो कभी बल के ही किसी अफसर के नाम से कॉल करते हैं। जवानों को इस तरह की फोन कॉल से बचने के लिए सचेत किया जा रहा है। उन्हें साइबर अपराध के बारे में जानकारी जा रही है।
सभी कार्मिकों को रोल कॉल/मार्का के माध्यम से इस तरह के मामलों की जानकारी दी जा रही है। कार्मिकों से कहा गया है कि वे अनजान कॉल, लिंक एवं ओटीपी के प्रति सतर्कता बरतें। सूत्रों ने बताया कि उक्त कंपनी के व्हाट्सऐप विज्ञापन ग्रुप को डिलीट करने आदेश दिया गया है।
धोखाधड़ी के मकसद से बल कार्मिकों को कॉल सीआरपीएफ ने अपने सभी कार्मिकों को सावधान करने के लिए पिछले सप्ताह ही सभी यूनिटों एक पत्र भेजा है। उसमें कहा गया है कि अज्ञात लोग धोखाधड़ी के मकसद से बल कार्मिकों को कॉल कर रहे हैं।
ऐसे लोग, बल के ग्रुप में शामिल होने का प्रयास करते हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि फोर्स की आंतरिक या खुफिया जानकारी एकत्रित की जा सके। इसके लिए वे बल के किसी अधिकारी का नाम लेते हैं और कहते हैं, सर ने कहा है, इस नंबर को कंपनी के ग्रुप में एड करो।
बाद में वही लोग मनी ट्रांसफर जैसी मांग करने लगते हैं। विज्ञापन विज्ञापन फलां मोबाइल नंबर को ग्रुप में एड करें 88 वीं बटालियन की एक महिला कार्मिक 'एसआई जीडी' के मोबाइल फोन पर कॉल आई, जिसमें सामने वाले व्यक्ति ने कहा कि वह सुधीर सर के यहां से बोल रहा है।
उससे कहा गया कि एक नंबर को ग्रुप में एड करो। जिस कार्मिक के मोबाइल पर कॉल आई थी, वे ग्रुप एडमिन हैं। दूसरी कॉल में एक अन्य महिला सिपाही से कहा गया कि सुधीर सर लाइन पर हैं। वे चाहते हैं कि फलां मोबाइल नंबर को ग्रुप में एड किया जाए।
वह कॉल भी उसी नंबर से आई थी, जिस नंबर से महिला एसआई को कॉल की गई। सामने वाले ने खुद को ही सुधीर सर बता दिया एक अन्य महिला सिपाही के नंबर पर कॉल आती है। यह भी नंबर भी वही था। कॉल करने वाले ने फिर से 'सुधीर सर' का नाम लिया और कहा कि फलां नंबर को कंपनी के ग्रुप में एड करो।
यह भी कहा कि सर, लाइन पर हैं। इसके बाद जिस महिला कर्मी के पास कॉल आई, उसमें सामने वाले ने खुद को ही सुधीर सर बता दिया। भरोसा दिलाने के लिए उस व्यक्ति ने यह भी बताया कि आपके पास पहले भी नंबर एड कराने के लिए कॉल आई थी। पांचवीं महिला एसआई के पास जो फोन आया, उसमें पैसों की मांग की गई।
छठी महिला कार्मिक जो एएसआई है, उसके पास कॉल आई कि सुधीर सर ने कहा है कि आप 'फोन पे' या पैसे ट्रांसफर करने का कोई दूसरा माध्यम उपयोग करती हैं तो उसकी डिटेल बताएं। सुधीर सर के नाम पर 45 हजार रुपये की मांग सातवीं महिला कार्मिक के पास जो फोन आया, उसमें सामने वाले ने फिर से सुधीर सर का नाम लिया।
महिला कार्मिक से कहा, वे सर को तो जानती ही हैं, इसलिए किसी दूसरे नंबर से 45 हजार रुपये ट्रांसफर कर दें। बता दें कि 2024 के दौरान भी बल में ठगी के लिए ऐसा ही मामला सामने आया था। कमांडेंट, टूआईसी, डिप्टी कमांडेंट और सहायक कमांडेंट के नाम से जवानों को फोन किए गए थे।
लिहाजा इन बलों का आधार 'अनुशासन' होता है, ऐसे में बहुत से जवान अपने सीनियर अधिकारी के नाम की पुष्टि करने की जहमत कम ही उठाते हैं। नतीजा, वे ठगों का शिकार हो जाते हैं। उस दौरान बल की सी/43 यूनिट में ठग ने एक जवान को फंसाने का प्रयास किया।
ठगों द्वारा डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए पैसा मांगा गया। तुम अपना पेटीएम ऑन करो जवान के मोबाइल पर जो कॉल आई, उसके ऑडियो के मुताबिक, अफसर बनकर वह ठग, जवान से कहता है, आप अपना व्हाट्सएप खोलिये। क्या आपने व्हाट्सएप ओपन कर लिया है।
जवान पूछता है, उसका क्या करना है सर। तुम लाइन पर रहो। गूगल पे, यूज करते हो। नहीं सर, पेटीएम है मेरे पास। देखो तुम्हें कुछ भेजा है। हां सर आया है। इसमें जयप्रकाश पासवान लिखा है। वह 25 हजार रुपये की पेमेंट किए है। ठग कहता है कि तुम अपना पेटीएम ऑन करो।
जवान, मुश्किल से यह पूछने का साहस जुटाता है कि आपका नाम क्या है। आप कौन बोल रहे हैं। वो छोड़िये, आप इस नंबर पर पैसे भेज दें। ठगी से यूं बचा वो जवान जवान ने फिर पूछा, साहब, आप कौन बोल रहे हैं। आप सुभाष साहब तो नहीं हैं। ठग बोला, मैडम ने डाली है पेमेंट।
मैं सुधीर साहब हूं। जवान कहता है, सर आप पहले तो बोले थे, हम सुभाष मीणा साहब हैं। अब कह रहे हैं सुधीर साहब हैं। इसके बाद जवान को कुछ शक होने लगता है। वह कहता है कि मैं कंपनी में फोन लगाकर मैडम से पूछ लेता हूं। मीणा साहब से पूछ लेता हूं।
अरे तुम वो छोड़ो। कोई अस्पताल में भर्ती है, इमरजेंसी है। तुम नंबर लगाओ और पेटीएम करो। फोन बाद में कर लेना। सर, आप ऐसा बोल रहे हैं। अच्छा तुम देखो कि पेटीएम पर क्या नंबर आ रहा है। जवान कहता है, नहीं साहब, मैं मैडम से बात कर लेता हूं।
उसके बाद ही कुछ कर सकूंगा। इस तरह से वह जवान, ठगी का शिकार होने से बच गया। रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc.
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| Topic Category | TECHNOLOGY |
| Jurisdiction | All India / National |
| Publication Date | 2 November 2026 |