ज़हरीले डार्ट मेंढक को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिया खर्च कर रहा करोड़ों डॉलर

गन्ने की फसलों में कुछ कीटों को नियंत्रित करने के लिए 1935 में ऑस्ट्रेलिया में केन टोडको लाया गया था. लेकिन अब तेज़ी से उनका प्रसार नए क्षेत्रों में हो रहा है.
- ✓गन्ने की फसलों में कुछ कीटों को नियंत्रित करने के लिए 1935 में ऑस्ट्रेलिया में केन टोडको लाया गया था.
- ✓रियो टिंटो नाम की कंपनी पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्षेत्र में ज़हरीले केन टोड (एक प्रकार का मेंढक) के प्रवेश को रोकने के लिए लाखों डॉलर खर्च कर रही है.
- ✓खनन कंपनी यहां लौह अयस्क की खदानें संचालित करती है.
- ✓रियो टिंटो पर्थ स्थित कर्टिन विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के सहयोग से 28 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 185 करोड़ रुपये) खर्च करेगी.
रियो टिंटो नाम की कंपनी पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्षेत्र में ज़हरीले केन टोड (एक प्रकार का मेंढक) के प्रवेश को रोकने के लिए लाखों डॉलर खर्च कर रही है. खनन कंपनी यहां लौह अयस्क की खदानें संचालित करती है. रियो टिंटो पर्थ स्थित कर्टिन विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के सहयोग से 28 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 185 करोड़ रुपये) खर्च करेगी.
इस राशि से रियो टिंटो का उद्देश्य 'मेंढक नियंत्रण क्षेत्र' स्थापित करना और इस हानिकारक मेंढक को दक्षिण की ओर फैलने से रोकना है. हालांकि केन टोड रियो टिंटो के व्यवसाय के लिए प्रत्यक्ष ख़तरा नहीं है, लेकिन इसके द्वारा छोड़े गए विष स्थानीय वन्यजीवों के लिए घातक हैं.
रियो टिंटो को पहले भी पिलबारा में लौह अयस्क भंडार के ऊपर स्थित दो आदिवासी चट्टानी शेल्टरों को नष्ट करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है. इस फ़ैसले के कारण कंपनी के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अपना पद गंवाना पड़ा.
देश भर में इसका कड़ा विरोध हुआ और बाद में रियो टिंटो ने स्थानीय आदिवासी समुदायों में भरोसे को फिर से कायम करने के लिए काम करने का वादा किया. आपके लिए नितिन श्रीवास्तव द्वारा चुनी गईं खास कहानियाँ ऑस्ट्रेलिया के न्यांगुमार्टा वॉरेन आदिवासी रिज़र्व में रेंजर के रूप में तैनात रोबर्टा हंटर ने कहा, "केन टोड पानी और जानवरों को नष्ट कर देते हैं.
जब वे हमारे क्षेत्र के क़रीब आते हैं, तो हम उन्हें रोकने के लिए वहां मौजूद रहना चाहते हैं. हम नहीं चाहते कि हमारा क्षेत्र नष्ट हो जाए." इस योजना के तहत ग्रेट सैंडी रेगिस्तान और हिंद महासागर के बीच 7,500 वर्ग किलोमीटर भूमि पर एक बांध बनाया जाएगा ताकि मेंढक को पानी तक पहुँचने से रोका जा सके.
सूखे महीनों के दौरान जीवित रहने के लिए केन टोड को हर कुछ दिनों में पानी की आवश्यकता होती है. जब प्राकृतिक जल स्रोत उपलब्ध नहीं होते हैं, तो यह मेंढक पशुपालन और सिंचाई के उद्देश्यों के लिए बनाए गए कृत्रिम जल स्रोतों पर निर्भर रहता है.
इन फ़ंड्स का इस्तेमाल बांधों, जल भंडारण टैंकों और अन्य भूमिगत जल स्रोतों तक इसे पहुंचने से रोकने के लिए किया जाएगा. पांच साल की यह परियोजना 2027 में शुरू होने वाली है. यदि केन टोड पिलबारा में प्रवेश कर जाए, तो वहां की कई देशी प्रजातियां लुप्तप्राय हो जाएंगी.
इनमें एक छोटा मांसाहारी जीव लुप्तप्राय उत्तरी क्वोल, गोआना छिपकली और घोस्ट बैट शामिल हैं. गन्ने की फसलों में कुछ कीटों को नियंत्रित करने के लिए 1935 में ऑस्ट्रेलिया में केन टोडको लाया गया था. तब से वे धीरे-धीरे देश के उत्तरी भाग में पश्चिम की ओर विस्तार कर रहे हैं.
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| Issuing Authority | BBC News Hindi |
|---|---|
| Topic Category | BUSINESS |
| Jurisdiction | All India / National |
| Publication Date | 7 November 2026 |