जेल में मनेगी गिरिबाला सिंह की दिवाली, हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज
ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने डिजिटल सबूतों, CCTV फुटेज और लंबित CFSL रिपोर्ट को अहम माना.
- ✓ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी.
- ✓मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है.
- ✓यह मामला उनकी बहू और पूर्व मॉडल-अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है.
- ✓अदालत ने कहा कि मामले में जांच अभी जारी है और कुछ अहम फोरेंसिक रिपोर्ट आना बाकी हैं.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है. यह मामला उनकी बहू और पूर्व मॉडल-अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है. अदालत ने कहा कि मामले में जांच अभी जारी है और कुछ अहम फोरेंसिक रिपोर्ट आना बाकी हैं.
ऐसे में इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा. न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने 26 अक्टूबर को बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया. 23 पन्नों का आदेश बुधवार देर रात अपलोड किया गया. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में मामले के तथ्यों, आरोपों की गंभीरता और जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों का उल्लेख किया.
इनमें डिजिटल ट्रांसक्रिप्ट, WhatsApp बातचीत, घटना से पहले और बाद की परिस्थितियां, CCTV फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट शामिल हैं. अदालत के मुताबिक, WhatsApp बातचीत से ट्विशा के गंभीर मानसिक तनाव और घुटन की स्थिति सामने आती है.
घटना की रात का घटनाक्रम और उसके बाद आरोपियों का व्यवहार भी मामले की सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण है. अदालत ने कहा कि जमानत के स्तर पर कथित अपराध के इरादे को बाकी परिस्थितियों से अलग करके नहीं देखा जा सकता. मामले के सभी पहलुओं की ट्रायल के दौरान गहन जांच जरूरी है.
64 वर्षीय गिरिबाला सिंह पर आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज प्रताड़ना के आरोप हैं. यह मामला CBI की ओर से दर्ज FIR से जुड़ा है. इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं. अभियोजन पक्ष का आरोप है कि ट्विशा को लगातार मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी.
उन पर निगरानी रखी जाती थी और उनके पेशेवर बैकग्राउंड को लेकर परेशान किया जाता था. अभियोजन के अनुसार, अप्रैल 2026 में मेडिकल तरीके से गर्भपात कराने के बाद तनाव और बढ़ गया था. अभियोजन पक्ष ने पति समर्थ सिंह की कथित नशीले पदार्थों की लत और बच्चे के पिता होने को लेकर हुए विवादों का भी उल्लेख किया.
आरोप है कि घरेलू मुद्दों पर विवाद के बाद समर्थ ने ट्विशा के साथ मारपीट की थी. उन पर अपने इक्विटी निवेश को विदेशी वित्तीय योजना में ट्रांसफर करने का दबाव डालने का आरोप भी लगाया गया है. ट्विशा शर्मा ने 9 दिसंबर 2025 को ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए मुलाकात के बाद वकील समर्थ सिंह से शादी की थी.
12 मई 2026 की रात वह अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं. उन्हें एम्स भोपाल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. दो पोस्टमार्टम रिपोर्टों में, जिनमें एम्स नई दिल्ली के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट भी शामिल है, मौत का कारण फंदे से लटकने के चलते दम घुटना बताया गया.
रिपोर्ट में इसे मृत्यु से पहले फंदे पर लटकने यानी एंटी-मॉर्टम हैंगिंग का मामला बताया गया है. गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि वह निर्दोष हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं. बचाव पक्ष का तर्क था कि इलेक्ट्रॉनिक बातचीत मुख्य रूप से उनके बेटे के खिलाफ शिकायतों की ओर इशारा करती है.
वकीलों ने मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि ट्विशा अवसाद से जूझ रही थीं और इसका संबंध नशीले पदार्थों के सेवन से था. बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि परिवार की ओर से ट्विशा के खाते में 7.5 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे. बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित करने के लिए स्पष्ट आपराधिक इरादा जरूरी है.
केवल प्रताड़ना के आरोप से यह अपराध साबित नहीं होता. साथ ही, गिरिबाला सिंह की उम्र और जांच में सहयोग को भी जमानत के पक्ष में आधार बताया गया. CBI, मध्य प्रदेश सरकार और पीड़ित परिवार की ओर से जमानत का विरोध किया गया. अभियोजन पक्ष ने ट्विशा की मौत से कुछ घंटे पहले भेजे गए WhatsApp संदेशों और घटनास्थल के CCTV फुटेज का हवाला दिया.
हाई कोर्ट ने कहा कि नई दिल्ली स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की कुछ अहम रिपोर्ट अभी आना बाकी हैं. इनमें ट्विशा के मोबाइल फोन और घर के DVR से निकाले गए डिजिटल डेटा की जांच शामिल है. अदालत ने इन रिपोर्टों को मामले के लिए महत्वपूर्ण माना.
CBI के वकील सुयश मोहन गुरु ने PTI वीडियो से बातचीत में बताया कि हाई कोर्ट ने सभी तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद जमानत याचिका खारिज की है. उन्होंने कहा कि ट्विशा का मुख्य मोबाइल फोन और घर का DVR अभी जांच के दायरे में हैं.
गुरु के मुताबिक, CBI ने अदालत में यह तर्क भी रखा कि मामले की शुरुआत से ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ की कोशिशें हुईं. अदालत ने इस संभावना को खारिज नहीं किया. हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद गिरिबाला सिंह को फिलहाल जमानत नहीं मिली है.
मामले की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी. (इनपुट एजेंसी से भी)
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| Issuing Authority | Aaj Tak National Hindi |
|---|---|
| Topic Category | INDIA |
| Jurisdiction | All India / National |
| Publication Date | 4 November 2026 |