सुप्रीम कोर्ट के अपडेट्स: शीर्ष अदालत से झटका, सजा पर रोक की सजा पर रोक की सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स: सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से झटका, सजा पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई से इनकार--सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स सुकेश चंद्रशेखर और अन्य की दलीलें हिंदी में
- ✓सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स: सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से झटका, सजा पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई से इनकार--सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स सुकेश चंद्रशेखर और अन्य की दलीलें हिंदी में
- ✓दिल्ली की एक अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के जज को फोन किया और एक विशेष न्यायाधीश को प्रभावित करने की कोशिश के मामले में उन्हें आठ साल की जेल की सजा सुनाई गई।
- ✓बराती जेबी पारडीवाला और रेस्टॉरेंट समुद्र तट के सामने सुकेश की याचिका की सुनवाई आई थी।
- ✓पृष्णि ने इसे अस्वीकार्य रूप से खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स - फोटो: अमर उजाला लिंक कॉपी किया गया सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कथित ठग सुकेश चन्द्रशेखर की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की गई थी। दिल्ली की एक अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के जज को फोन किया और एक विशेष न्यायाधीश को प्रभावित करने की कोशिश के मामले में उन्हें आठ साल की जेल की सजा सुनाई गई।
बराती जेबी पारडीवाला और रेस्टॉरेंट समुद्र तट के सामने सुकेश की याचिका की सुनवाई आई थी। पृष्णि ने इसे अस्वीकार्य रूप से खारिज कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 अगस्त को सुकेश चन्द्रशेखर को दोषी ठहराने की याचिका दायर की थी। इसके बाद 29 अगस्त को उन्हें आठ साल की कैद की सजा सुनाई गई।
सुकेश ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। साथ ही उसने अपील पर फैसला आने तक अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग भी की थी। 16 आर्काइव को उच्च न्यायालय ने अपनी याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि दोषसिद्धि के खिलाफ पहले कोर्ट में अपील की गई थी।
ऐसे में वकील की याचिका और निष्कर्षों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। उच्च न्यायालय ने सुकेश को अपील के दौरान अपने सभी जेलों में रखने की छूट दी थी। तीन दोषियों को आठ साल की सज़ा दी गई थी। दिल्ली की अदालत ने इस मामले को वास्तु व्यवस्था के प्रति गंभीर अपराध बताते हुए इसे 'संस्थागत अपवित्रता' करार दिया था।
सुकेश को सरकारी कर्मचारी का पद संभालने और सरकारी कर्मचारी को दो-दो साल के अपराध में कड़ी सजा सुनाई गई थी। वहीं, अन्यत्र तरीके से आपराधिक आपराधिक आपराधिक मामला दर्ज कर चार साल की सजा दी गई थी। एक के बाद एक कोर्ट ने तीसरी सजा का आदेश दिया था।
इस वजह से कुल सजा आठ साल हुई। जज बीवर फोन करने की साजिश कैसे रची गई थी? यह मामला 28 अप्रैल 2017 का है। उस समय सुकेश चन्द्रशेखर एक किले के मामले में पुलिस व्यवस्था में थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसने एक पुलिसकर्मी का मोबाइल फोन हासिल किया था।
इसके बाद उन्होंने चोट लगने से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष न्यायाधीश पूनम चौधरी के आधिकारिक फोन नंबर पर संपर्क किया। ट्रायल कोर्ट के अनुसार, सुकेश ने पहले खुद को सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश के निजी सचिव के रूप में नियुक्त किया और बाद में उसी न्यायाधीश के रूप में अपनी पहचान बताई।
अदालत का मानना था कि वह ऐतिहासिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के इरादे से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। हर खबर से अपडेट रहें, डाउनलोड करें Android हिंदी समाचार ऐप्स, iOS हिंदी समाचार ऐप्स और अमर उजाला हिंदी समाचार ऐप्स अपने मोबाइल पे|राजनीति, खेल, मनोरंजन, प्रौद्योगिकी और शिक्षा आदि के लाइव अपडेट हिंदी में प्राप्त करें।
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| Publication Date | 1 November 2026 |