टॉयलेट के कमोड में कुंडली मार बैठा था कोबरा, प्लास्टिक पाइप से रेस्क्यू
Black Cobra In Toilet: महाराष्ट्र के अकोला में एक घर के टॉयलेट के कमोड में ब्लैक कोबरा कुंडली मारकर बैठा मिला. वन्यजीव वार्डन बाल काळणे ने प्लास्टिक पाइप की मदद से सांप का सुरक्षित रेस्क्यू किया.
- ✓Black Cobra In Toilet: महाराष्ट्र के अकोला में एक घर के टॉयलेट के कमोड में ब्लैक कोबरा कुंडली मारकर बैठा मिला.
- ✓महाराष्ट्र के अकोला में एक घर के टॉयलेट में बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है.
- ✓यहां कमोड के अंदर एक जहरीला ब्लैक कोबरा कुंडली मारकर बैठा हुआ मिला.
- ✓यह घटना 1 नवंबर 2026 की रात करीब 10 बजे अकोला की सुधीर कॉलोनी में कांडेकर परिवार के घर में हुई.
महाराष्ट्र के अकोला में एक घर के टॉयलेट में बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां कमोड के अंदर एक जहरीला ब्लैक कोबरा कुंडली मारकर बैठा हुआ मिला. यह घटना 1 नवंबर 2026 की रात करीब 10 बजे अकोला की सुधीर कॉलोनी में कांडेकर परिवार के घर में हुई.
टॉयलेट इस्तेमाल करने पहुंचे परिवार के सदस्यों की नजर जैसे ही कमोड के अंदर बैठे नाग पर पड़ी, घर में हड़कंप मच गया. गनीमत रही कि समय रहते सांप दिखाई दे गया और एक बड़ा हादसा टल गया. सूचना मिलने पर वन्यजीव विभाग के वार्डन बाल काळणे मौके पर पहुंचे.
उन्होंने बेहद सूझबूझ, विवेक और धैर्य का परिचय देते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. कमोड के अंदर कुंडली मारकर बैठे जहरीले ब्लैक कोबरा को बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण था. ऐसे में बाल काळणे ने एक प्लास्टिक पाइप की मदद ली और पूरी सतर्कता के साथ धीरे-धीरे नाग को कमोड से बाहर निकाला.
इस दौरान उन्होंने विशेष सावधानी बरती, जिससे बिना किसी अनहोनी के ब्लैक कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सका. उनकी सूझबूझ और शांत तरीके से की गई कार्रवाई के चलते संभावित बड़ा खतरा टल गया. इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक जहरीला नाग घर के टॉयलेट के कमोड तक कैसे पहुंचा?
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, घरों की ड्रेनेज लाइन, सर्विस पाइप और खुले पाइप कनेक्शन के रास्ते सांप घरों तक पहुंच सकते हैं. खासकर पाइप के खुले हिस्सों पर सुरक्षा जाली नहीं होने से ऐसी घटनाओं की आशंका बनी रहती है. इसलिए घरों के ड्रेनेज सिस्टम, सर्विस लाइन और पाइप कनेक्शन की नियमित जांच करना जरूरी है.
वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर असर वन्यजीव विभाग के वार्डन बाल काळणे के मुताबिक, आमतौर पर नवंबर महीने में सांपों के दिखाई देने की घटनाएं काफी कम होती हैं. लेकिन इस साल क्षेत्र में सूखे की स्थिति और पानी की कमी का असर सीधे सरपटने वाले वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर पड़ रहा है.
लगातार गर्म बनी रहने वाली जमीन, सूखते जलस्रोत और ठंडी जगहों की कमी के कारण नाग, घोणस और अजगर जैसे सरीसृप पानी और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में गांवों तथा शहरी बस्तियों की ओर आ रहे हैं. बाल काळणे के अनुसार, पिछले दो महीनों में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में अजगरों के मिलने और उनके रेस्क्यू की घटनाएं भी सामने आई हैं.
अजगर सामान्यतः पानी के आसपास अपना प्राकृतिक आवास बनाते हैं, लेकिन प्राकृतिक जलस्रोतों में पानी की कमी के कारण वे भी अब गांवों और शहरों के आसपास दिखाई दे रहे हैं. जून-जुलाई 2027 तक वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए जून-जुलाई 2027 में मानसून आने तक वन विभाग, वन्यजीव प्रेमियों और सर्पमित्रों के सामने वन्यजीवों को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती रहने की आशंका है.
प्राकृतिक जलस्रोतों का सूखना और उनके आवासों में पानी की कमी वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है. वन्यजीव विभाग की सलाह है कि घर में या टॉयलेट में सांप दिखाई देने पर उसे खुद पकड़ने या मारने की कोशिश बिल्कुल न करें.
सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तत्काल प्रशिक्षित सर्पमित्र या वन विभाग को सूचना दें. इसके अलावा घरों की ड्रेनेज लाइन, सर्विस पाइप और कमोड से जुड़े खुले रास्तों पर सुरक्षा जाली लगवाना भी जरूरी है. अकोला की यह घटना एक बार फिर बताती है कि सूखे की स्थिति का असर केवल इंसानों और खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सबसे गंभीर प्रभाव प्राकृतिक आवास पर निर्भर वन्यजीवों पर भी पड़ रहा है.
पानी और ठंडे सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जहरीले सांप अब घरों तक पहुंच रहे हैं. ऐसे में वन्यजीवों का संरक्षण और नागरिकों की सुरक्षा दोनों वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं.
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| Issuing Authority | Aaj Tak National Hindi |
|---|---|
| Topic Category | INDIA |
| Jurisdiction | All India / National |
| Publication Date | 2 November 2026 |