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National News Desk
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अमेरिका ने भारत के ख़िलाफ़ 100 फ़ीसदी टैरिफ़ लगा दिया तो क्या होगा?

BBC News HindiBy BBC News Hindi
25 Sept 2026
Original: English
अमेरिका ने भारत के ख़िलाफ़ 100 फ़ीसदी टैरिफ़ लगा दिया तो क्या होगा?
अमेरिका ने भारत के ख़िलाफ़ 100 फ़ीसदी टैरिफ़ लगा दिया तो क्या होगा?
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ट्रंप ने नरेंद्र मोदी के कई लक्ष्यों को अधर में लटका दिया है. क्या भारत के पास अमेरिका का कोई विकल्प है या ट्रंप की नीतियां स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है?

Key Highlights & Official Takeaways
  • ✓ट्रंप ने नरेंद्र मोदी के कई लक्ष्यों को अधर में लटका दिया है.
  • ✓अमेरिकी कांग्रेस ने 16 सितंबर को लिंडसे ओ.
  • ✓ग्राहम सैंक्शनिंग रशा एंड ईरान एक्ट को 262 के मुक़ाबले 159 मतों से पास किया था.
  • ✓अमेरिकी सीनेट इस बिल को सात अगस्त को भारी बहुमत से पास कर चुकी थी.
Comprehensive News & Policy Report

अमेरिकी कांग्रेस ने 16 सितंबर को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशा एंड ईरान एक्ट को 262 के मुक़ाबले 159 मतों से पास किया था. अमेरिकी सीनेट इस बिल को सात अगस्त को भारी बहुमत से पास कर चुकी थी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर भी कर दिया है और यह बिल क़ानून बन गया है.

अब ट्रंप को भारत पर 100 फ़ीसदी तक टैरिफ़ लगाने का अधिकार मिल गया है. बिल पास होने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि चीन और भारत को अपना रवैया सुधारना चाहिए और तेल, गैस "कहीं और से ख़रीदना चाहिए".

यह क़ानून ट्रंप को ये तय करने की व्यापक छूट देता है कि इन टैरिफ़ का इस्तेमाल कब और किस तरह किया जाए. यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह भारतीय सामान के अमेरिकी आयात की लागत बढ़ाने वाले टैरिफ़ कब लगाएंगे या लगाएंगे भी या नहीं. भारत के लिए इस क़ानून को एक धमकी के तौर पर देखा जा रहा है.

इससे ट्रंप का दबाव बनाने का प्रभाव बढ़ सकता है, ख़ासकर ऐसे समय में जब वह रूस के साथ व्यापारिक समझौतों की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं. अगस्त 2026 तक भारत, चीन के बाद रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा ख़रीदार था. ऐसे में संभावित अमेरिकी टैरिफ़ का सबसे ज़्यादा असर इन दोनों एशियाई देशों पर पड़ सकता है.

दिसंबर 2022 से अगस्त 2026 के बीच रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50 फ़ीसदी जबकि भारत की हिस्सेदारी 37 फ़ीसदी थी. भारत के विदेश मंत्रालय ने बिल पास होने के बाद तुरंत बयान जारी किया. मंत्रालय ने कहा कि उसने अमेरिका के समक्ष इस मुद्दे को उठाया है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि इसका असर न केवल द्विपक्षीय संबंधों, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार पर भी पड़ सकता है.

जुलाई 2026 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 51 फ़ीसदी से अधिक थी. ऐसे समय में जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से होकर तेल की आवाजाही बाधित है, 30 दिनों के भीतर रूसी तेल पर निर्भरता को बड़े पैमाने पर कम करना भारत के लिए मुश्किल हो सकता है.

भारत के लिए दोनों स्थितियां ही मुश्किल हैं. भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल ख़रीदना जारी रखता है तो ट्रंप के टैरिफ़ का बोझ उठाना पड़ सकता है. दूसरी स्थिति यह है कि टैरिफ़ से बचने के लिए भारत रूसी तेल के आयात में कटौती करता है तो इसे बार-बार अमेरिका के दबाव में झुकने जैसा देखा जाएगा.

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से तेल की आवाजाही बाधित है और कच्चे तेल की क़ीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, भारत के लिए तेल के नए स्रोत तलाशना महंगा पड़ सकता है.

अगर अमेरिका भारतीय सामान पर 100 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाता है, तो यह एक बड़ा झटका होगा. इससे अमेरिका में भारतीय आयात की लागत लगभग दोगुनी हो जाएगी और कई उत्पाद व्यावसायिक रूप से प्रतिस्पर्धी नहीं रहेंगे. इसका तत्काल बोझ मुख्य रूप से भारतीय निर्यातकों और उनके कर्मचारियों पर पड़ेगा, लेकिन अमेरिकी आयातकों, खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को भी अधिक क़ीमतों या सीमित विकल्पों का सामना करना पड़ सकता है.

अमेरिका टैरिफ़ बढ़ाता है तो इसकी वसूली अमेरिकी आयातकों से होती है लेकिन व्यवहार में इसका सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ेगा. भारत पहले से ही व्यापार घाटा से जूझ रहा है. अगर कोई अमेरिकी आयातक भारत से 20 डॉलर का कपड़ा ख़रीदता है, तो 100 फ़ीसदी टैरिफ़ से सीमा पर ही 20 डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लग सकता है.

इसके बाद घरेलू परिवहन, खुदरा मार्जिन और अन्य टैक्ट भी जुड़ेंगे. अगर वही उत्पाद किसी दूसरे देश से काफ़ी कम टैरिफ़ पर मिल सकता है, तो भारत से महंगा सामान ख़रीदने का कोई कारण नहीं रहेगा.

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Issuing AuthorityBBC News Hindi
Topic CategoryWORLD
JurisdictionAll India / National
Publication Date25 September 2026
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