दिवाली 2026: किसी को याद आई बचपन की दिवाली, कोई कैंटोनमेंट के जश्न की यादों में डूबा, सितारों ने सुनाए किस्से
Diwali 2026: दिवाली पर हर किसी के पास सुनाने के लिए कोई न कोई किस्सा होता है। किसी को बचपन में घर सजाने और रंगोली बनाने की याद आती है, तो किसी को परिवार के साथ बिताए वे दिन याद आते हैं।
- ✓Diwali 2026: दिवाली पर हर किसी के पास सुनाने के लिए कोई न कोई किस्सा होता है।
- ✓दिवाली के त्योहार पर सितारों ने इस त्योहार से जुड़ी खूबसूरत यादें साझा कीं।
- ✓बचपन की दिवाली आज भी बहुत याद आती है।
- ✓घर की सजावट, रंगोली बनाना, नए कपड़े पहनना और पूजा की तैयारी करना।
दिवाली के त्योहार पर सितारों ने इस त्योहार से जुड़ी खूबसूरत यादें साझा कीं। 'मेरी दिवाली, मेरी कहानी' में सई मांजरेकर, अक्षय ओबेरॉय, निमृत कौर अहलूवालिया, इशिता राज और संस्कृति जायना ने अमर उजाला डिजिटल के साथ बातचीत में अपनी जिंदगी की यादगार दिवाली के किस्से सुनाए और बताया कि वे कौन-सा पल दोबारा जीना चाहते हैं।
सई मांजरेकर - फोटो : इंस्टाग्राम@saieemmanjrekar सई मांजरेकर: बचपन वाली दिवाली फिर मनाना चाहती हूं 'मेरे लिए दिवाली हमेशा से परिवार, परंपराओं और साथ बिताए अच्छे पलों का त्योहार रही है। बचपन की दिवाली आज भी बहुत याद आती है।
घर की सजावट, रंगोली बनाना, नए कपड़े पहनना और पूजा की तैयारी करना। इन सबका अपना ही मजा था। दिवाली के आसपास घर में एक अलग ही उत्साह रहता था। हर कोई अपनी-अपनी तैयारियों में लगा रहता था। पूरा घर रोशनी और खुशियों से भर जाता था।
आज जब उन दिनों को याद करती हूं, तो लगता है कि त्योहार की असली खुशी इन्हीं छोटी-छोटी बातों में थी। अगर मुझे अपनी जिंदगी की किसी एक दिवाली को दोबारा जीने का मौका मिले, तो मैं बचपन वाली दिवाली चुनूंगी। चाहूंगी कि घर बिल्कुल वैसे ही सजे।
हम सब मिलकर रंगोली बनाएं, दीये जलाएं और लक्ष्मी पूजा करें। इसमें मेरे माता-पिता, परिवार के सभी सदस्य और करीबी दोस्त हों। आज की व्यस्त जिंदगी में सबका एक साथ बैठना आसान नहीं है। इसलिए उस दिन किसी को कहीं जाने की जल्दी न हो।
हम बस साथ वक्त बिताएं और नई यादें बनाएं।' अक्षय ओबेरॉय - फोटो : इंस्टाग्राम@akshay0beroi अक्षय ओबेरॉय: अब समझ आता है कि परिवार के साथ होना कितना जरूरी है 'मेरे लिए दिवाली हमेशा परिवार के साथ वक्त बिताने का मौका रही है। अगर अपनी किसी एक दिवाली की बात करूं, तो बचपन के दिन सबसे ज्यादा याद आते हैं।
उस वक्त त्योहार को लेकर अलग ही उत्साह होता था। घर की सफाई और सजावट से लेकर नए कपड़े पहनने, पूजा करने और परिवार के साथ मिठाइयां बांटने तक, हर चीज में खुशी मिलती थी। सबसे अच्छी बात यह थी कि पूरा परिवार एक छत के नीचे होता था।
किसी को कहीं जाने की जल्दी नहीं होती थी। अब जिंदगी काफी व्यस्त हो गई है। काम और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच परिवार के साथ बैठने का वक्त कम मिलता है। अगर मुझे कोई एक दिवाली दोबारा मनाने का मौका मिले, तो मैं एक साधारण-सी फैमिली दिवाली चुनूंगा।
उसमें मेरे माता-पिता, पत्नी, बेटा और परिवार के बाकी सदस्य हों। हम सब मिलकर घर सजाएं, दीये जलाएं और पूजा करें। इसके बाद साथ बैठकर खाना खाएं। मैं उस दिन फोन कॉल और काम की चिंताओं से दूर रहना चाहूंगा। बचपन में दिवाली का मतलब नए कपड़े और पटाखे हुआ करते थे।
अब समझ आता है कि इस दिन अपनों का साथ होना सबसे जरूरी है।' निमृत कौर अहलूवालिया - फोटो : इंस्टाग्राम@nimritahluwalia निमृत कौर अहलूवालिया: मुंबई में अकेले जलाया था पहला दीया 'आर्मी परिवार में पली-बढ़ी हूं। इसलिए बचपन की दिवाली की अपनी अलग यादें हैं।
हमारी दिवाली काफी अनुशासन के साथ मनती थी। कैंटोनमेंट के दोस्त, पापा की सख्त टाइमिंग और मम्मी के हाथों की मिठाइयां। त्योहार के दिनों में घर में खूब रौनक रहती थी। लेकिन जब मैं अभिनय की दुनिया में कदम रखने के लिए मुंबई आई, तो एक दिवाली बिल्कुल अलग थी।
नए शहर में अकेले अपना करियर बनाने की कोशिश कर रही थी। उस वक्त दिवाली पर घर की बहुत याद आई। मुझे आज भी वह रात याद है, जब मैंने अपने छोटे से किराये के घर की बालकनी में पहला दीया जलाया था। फिर मम्मी-पापा को वीडियो कॉल किया।
उनकी आंखों में मेरे लिए गर्व और सुकून था। वह देखकर मुझे भी बहुत अच्छा लगा। उस छोटी-सी बालकनी में जलाया गया वह दीया मेरे लिए बहुत खास बन गया। अगर मुझे अपनी जिंदगी की किसी एक दिवाली को दोबारा जीने का मौका मिले...तो मैं बचपन के कैंटोनमेंट वाले दिनों में लौटना चाहूंगी।
शाम का वक्त हो, हल्की ठंड हो और घर में मिठाइयों की खुशबू फैली हो। मम्मी रसोई में गर्मागर्म पिन्नियां बना रही हों। पापा आंगन में लाइटें और दीये लगाने के निर्देश दे रहे हों। मैं अपने सबसे प्यारे देसी सूट में तैयार होकर बस इस इंतजार में रहूं कि कब मम्मी का ध्यान हटे और मैं गर्म मिठाई चुरा सकूं।
मेरा भाई और बचपन के दोस्त भी साथ हों। उनके साथ फूलझड़ियां और चकरियां जलाना, देर रात तक बातें करना। आज भी उस दिवाली की यही तस्वीर मेरे मन में है।' इशिता राज - फोटो : इंस्टाग्राम@iamishitaraj इशिता राज: परिवार के साथ दिवाली मनाना ही सबसे खास 'मेरे लिए दिवाली का मतलब परिवार के साथ होना और मिलकर त्योहार मनाना है।
हर साल दिवाली पर यही माहौल बनाने का मन करता है। मेरे माता-पिता, बहन, भाई और दोस्त सब आसपास हों। हम सब तैयार हों, साथ बैठें और खूब बातें करें। अच्छा खाना खाएं, मिठाइयों का मजा लें और खूब हंसी-मजाक करें। मुझे लगता है कि दिवाली की असली खूबसूरती इसी में है।
घर में अपनों की मौजूदगी, चारों तरफ रोशनी और मिठाइयों की मिठास। यही सब मिलकर दिवाली को मेरे लिए खास बनाते हैं।' संस्कृति जायना - फोटो : इंस्टाग्राम@sans09 संस्कृति जायना: दादा के साथ आखिरी दिवाली की तस्वीरें आज भी संभालकर रखी हैं 'मेरे घर में दिवाली हमेशा से दूसरों के साथ खुशियां बांटने का त्योहार रही है।
मम्मी-पापा हर साल करीब 100 परिवारों के साथ 'दिलवाली दिवाली' मनाते हैं। बचपन में दिवाली से पहले हमारे घर 20-25 वॉलंटियर्स जुटते थे। हम सब मिलकर कपड़े, राशन, जूते और कंबल जैसी जरूरत की चीजें इकट्ठा करते थे। पापा इन चीजों से एक बड़ी रंगोली बनवाते थे।
फिर प्रार्थना करके हम जरूरतमंद परिवारों तक सामान पहुंचाते थे। हम ऐसे गांवों में भी जाते थे, जहां छुआछूत और जातिगत भेदभाव देखने को मिलता है। वहां परिवारों के साथ बैठकर खाना खाते और दिवाली मनाते थे। अगर मुझे एक दिवाली दोबारा जीने का मौका मिले, तो मैं उस आखिरी दिवाली में लौटना चाहूंगी, जब मेरे दादा ईश्वरभाई पटेल हमारे साथ थे।
लोग उन्हें प्यार से 'मिस्टर टॉयलेट' कहते थे। उन्होंने अपना जीवन स्वच्छता और समाजसेवा को समर्पित कर दिया था। उस दिवाली पूरा परिवार एक साथ था। घर सजा था, हमने खूब तस्वीरें खिंचवाई थीं और वीडियो बनाए थे। तब हमें नहीं पता था कि दादा के साथ इतना कम वक्त बचा है।
आज भी वे तस्वीरें देखकर लगता है कि उनमें मेरी पूरी दुनिया समाई हुई है। मैं बस एक बार फिर वही फैमिली फोटो खिंचवाना चाहती हूं, जिसमें कोई भी कम न हो। रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|Get all Entertainment news in Hindi related to bollywood, television, hollywood, movie reviews, etc.
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| Issuing Authority | Amar Ujala National Hindi |
|---|---|
| Topic Category | ENTERTAINMENT |
| Jurisdiction | All India / National |
| Publication Date | 8 November 2026 |