2026: किसी को याद आई बचपन की, किसी कैंटोनमेंट की यादों में डूबा, सितारों ने सुनाए किस्से
दिवाली 2026: हर किसी के पास सुनने के लिए कोई न कोई किस्सा होता है। किसी को बचपन में घर की सजावट और रंगोली बनाने की याद आती है, तो किसी को परिवार के साथ घर की सजावट और रंगोली बनाने की याद आती है।
- ✓दिवाली 2026: हर किसी के पास सुनने के लिए कोई न कोई किस्सा होता है।
- ✓फेस्टिव स्टार्स ने इस खूबसूरत खूबसूरत शेयरिंग किंम को अपने नाम कर लिया है।
- ✓साईं मांजरेकर - फोटो : साईं मांजरेकर : बचपन वाली फिर मनाना चाहती हूं 'मेरे लिए हमेशा से परिवार, मित्र और साथ में प्यारे दोस्तों का त्योहार रही है।
- ✓बचपन की आज भी बहुत याद आती है।
फेस्टिव स्टार्स ने इस खूबसूरत खूबसूरत शेयरिंग किंम को अपने नाम कर लिया है। 'मेरी, मेरी कहानी' में सई मांजरेकर, अक्षय ओबेरॉय, निमृत कौर अहलूवालिया, इशिता राज और संस्कृति जियाना ने अमर उजाला डिजिटल के साथ बातचीत में अपनी जिंदगी की यादें चाहते हैं कि वे कौन-सा दोस्त हैं।
साईं मांजरेकर - फोटो : साईं मांजरेकर : बचपन वाली फिर मनाना चाहती हूं 'मेरे लिए हमेशा से परिवार, मित्र और साथ में प्यारे दोस्तों का त्योहार रही है। बचपन की आज भी बहुत याद आती है। घर की सजावट, रंगोली बनाना, नए कपड़े पहनना और पूजा की तैयारी करना।
इनमें हर किसी को अपना ही मजा था। घर के आसपास एक अलग ही उत्साह रहता था। हर कोई अपने-अपने इण्टरनेट में रहता था। पूरे घर में रोशनी और खुशियों से भर गया। आज जब उन दिनों की याद आती है, तो लगता है कि उस त्योहार की असली खुशी छोटी-छोटी बातें थी।
अगर मुझे अपनी जिंदगी की कोई एक फिल्म का मौका मिले, तो मैं बचपन वाली गुड़िया हूं। इच्छा कि घर बिल्कुल वैसा ही सजे। हम सब मिलकर रंगोली बनाते हैं, जलाते हैं और लक्ष्मी पूजा करते हैं। इसमें मेरे माता-पिता, परिवार के सभी सदस्य और घनिष्ठ मित्र हैं।
आज की जिंदगी में हर किसी के साथ एक साथ रहना आसान नहीं है। इसलिए उस दिन किसी को भी कहीं जाने की जल्दी न हो। हम बस साथ वक्ता और नई यादें कायम करते हैं।' अक्षय ओबेरॉय - फोटो: अक्षय कुमार अगर अपनी किसी की एक बात, तो बचपन का दिन सबसे ज्यादा याद आता है।
उस समय त्योहार को लेकर एक अलग ही उत्साह होता था। घर की साफ-सफाई और साज-सज्जा से लेकर नई पोशाकें, पूजा करने और परिवार के साथ मिठाइयां झलकने तक, हर चीज में खुशियां थीं। सबसे अच्छी बात यह थी कि पूरा परिवार एक छत के नीचे हुआ था।
किसी को कहीं जाने की जल्दी नहीं होती थी। अब जिंदगी काफी व्यस्त हो गई है। काम और दूसरी दुनिया के बीच परिवार के साथ बैठने का वक्त कमिटी है। अगर मुझे कोई एक परिवार का मौका मिले, तो मैं एक साधारण-सी परिवार चुनूंगा। इसमें माता-पिता, पत्नी, बेटा और परिवार के बाकी सदस्य शामिल हैं।
हम सब मिलकर घर सजाएं, जलाएं और पूजा करें। इसके बाद साथ में खाना भी उपलब्ध है। मैंने उस दिन फोन किया और काम की बात से दूर जाना चाहा। बचपन में का मतलब नई पोशाकें और बॅटाज़ होते थे। अब समझ आ गया है कि इस दिन डीली का साथ होना सबसे जरूरी है।' निमृत कौर अहलूवालिया - फोटो: अनमोल@nimritahluwalia निमृत कौर अहलूवालिया: मुंबई में अकेले जलाया था पहला दीया 'आर्मी परिवार में पाली-बढ़ी हूं।
इसलिए बचपन की अपनी अलग यादें हैं। हमारी काफी निर्देश के साथ मानती थी। कैंटोनमेंट के दोस्त, पापा की सख्त टाइमिंग और माँ के हाथों की मिठाइयाँ। त्योहारों के दिनों में घर में खूब दुकानें रहती थीं। लेकिन जब मैंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा तो मुंबई आई, तो बिल्कुल अलग थी।
नए शहर में अकेले अपना बिजनेस बनाने की कोशिश कर रही थी। उस वक्त घर की बहुत याद आई। आज भी उसे रात याद है, जब मैंने अपने छोटे से भाई के घर की झलक में पहला दीया जलाया था। फिर माँ-पापा को वीडियो कॉल किया। उनकी आँखों में गर्व और सर्वशक्तिमान होना था।
मुझे देखकर उसे भी बहुत अच्छा लगा। वो छोटी सी पेंटिंग में जो दिया वो मेरे लिए बहुत खाश बन गया। अगर मुझे अपनी जिंदगी की कोई एक फिल्म का मौका मिले...तो मैं बचपन के कैंटोनमेंट वाले दिनों में लौटना चाहता हूं। शाम का वक्त हो, हल्की ठंड हो और घर में मिठाइयों की चॉकलेट हो।
माँ की रसोई में गर्मागर्म पिन्नियाँ बनी रही हूँ। पापा बाले में लाइटें और दीये के निर्देश दे रहे हैं। मैं अपने सबसे प्यारे देसी सूट में तैयार बस इस इंतजार में रहूं कि कब माँ का ध्यान हटे और मैं गर्म मिठाई चुराया हुआ। मेरा भाई और बचपन का दोस्त भी साथ हूँ।
उनके साथ फूल झंझट और चकरियां जलाना, देर रात तक बातें करना। आज भी उसकी यही तस्वीर मेरे मन में है।' इशिता राज - फोटो : इशिता राज : परिवार के साथ मनाना ही सबसे खास 'मेरे लिए परिवार के साथ रहना और सामूहिक उत्सव मनाना है। हर साल येही मोनामी बनाने का मन करता है।
मेरे माता-पिता, बहन, भाई और दोस्त सब आसपास हैं। हम सब तैयार हैं, साथ बैठें और अच्छी बातें करें। अच्छा खाना बढ़िया, मिठाइयों का मजा लें और बढ़िया हंसी-मजाक करें। मुझे लगता है कि असली खूबसूरती भी ऐसी ही है। घर में मंदिर की व्यवस्था, चारों तरफ रोशनी और मिठाइयों की झलक।
यही सब मिलकर मेरे लिए खास हैं।' संस्कृति जायना - फोटो : सान्स09 संस्कृति : दादा के साथ आखिरी की तस्वीरें आज भी सलामत रखती हैं 'मेरे घर में हमेशा के लिए खुशियों का त्योहार रही है। माँ-पापा हर साल करीब 100 परिवार के साथ 'दिलवाली' बनाते हैं।
बचपन से पहले हमारे घर 20-25 वॉलंटियर्स बचे थे। हम सब मिलकर कपड़े, राशन, कपड़े और कपड़े जैसी ज़रूरत की चीज़ें इकट्ठा करते थे। पापा इन एनिमे से एक बड़ी रंगोली बनवाते थे। फिर प्रार्थना करके हम सामान सामान तक पहुंचाते थे। हम ऐसे भी गए थे, जहां छुट और जातिगत भेदभाव को देखा जाता है।
वहां परिवार के साथ खाना खाया और मशगूल थे। अगर मुझे एक फिल्म का मौका मिला, तो मुझे वह आखिरी इच्छा थी, जब मेरे दादा ईश्वरभाई पटेल हमारे साथ थे। लोग उन्हें प्यार से 'मिस्टर सीक्रेट' कहते थे। उन्होंने अपनी जीवन स्वतंत्रता और समाजसेवा को समर्पित किया था।
वह पूरा परिवार एक साथ था। घर की सज़ा थी, हमने खूब खूब तस्वीरें खानवाई वाली और वीडियो बनाई थीं। तब हमें नहीं पता था कि दादाजी के साथ इतना कम वक्त बचा है। आज भी उनकी तस्वीरें देखकर ऐसा लगता है कि ये मेरी पूरी दुनिया में समाई हैं।
मैं बस एक बार फिर से पुरानी फैमिली फोटो खानदानी चाहता हूं, जिसमें कोई भी कम न हो। हर खबर से अपडेट रहें, डाउनलोड करें Android हिंदी समाचार ऐप, iOS हिंदी समाचार ऐप और अमर उजाला हिंदी समाचार ऐप अपने मोबाइल पर|बॉलीवुड, टेलीविजन, हॉलीवुड, फिल्म समीक्षा आदि से संबंधित सभी मनोरंजन समाचार हिंदी में प्राप्त करें।
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| Issuing Authority | Amar Ujala National Hindi |
|---|---|
| Topic Category | ENTERTAINMENT |
| Jurisdiction | All India / National |
| Publication Date | 8 November 2026 |