मंगलवार के उपाय: जीवन की चिंता दूर करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ, जानिए इसके 5 बड़े फायदे
मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा पाठ: मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ विशेष शुभ माना जाता है। सिद्धांत यह है कि नियमित पाठ से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर कृपा करते हैं।
- ✓मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा पाठ: मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ विशेष शुभ माना जाता है।
- ✓4 में से 1 मंगलवार के उपाय - फोटो: अमर उजाला लिंक कॉपी किया गया हनुमान चालीसा पाठ मंगलवार को: मंगलवार का दिन हनुमान चालीसा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
- ✓इस दिन हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से बजरंगबली की जय-जयकार होती है और उनके भक्तों पर कृपा बरसती है।
- ✓सिद्धांत है कि, हनुमान चालीसा में भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की शक्ति और गुण का वर्णन किया गया है।
4 में से 1 मंगलवार के उपाय - फोटो: अमर उजाला लिंक कॉपी किया गया हनुमान चालीसा पाठ मंगलवार को: मंगलवार का दिन हनुमान चालीसा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से बजरंगबली की जय-जयकार होती है और उनके भक्तों पर कृपा बरसती है।
सिद्धांत है कि, हनुमान चालीसा में भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की शक्ति और गुण का वर्णन किया गया है। इसलिए इसका पाठ करने से मन में सकारात्मक विचार आते हैं और लक्ष्य बढ़ते हैं। साथ ही, व्यक्ति को मानसिक शांति और नई ऊर्जा का अनुभव होता है।
यही वजह है कि मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना विशेष फलदायक माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं हनुमान चालीसा का पाठ करने से मिलने वाले 5 बड़े फायदे। 4 में से 2 मंगलवार के उपाय - फोटो : अमर उजाला हनुमान चालीसा के बड़े लाभ 4 में से 3 मंगलवार के उपाय - फोटो : एडोब स्टॉक इसे नियमित पाठ करने से व्यक्ति के अंदर लाभ और साहस बढ़ता है।
इससे वह कठिन राइनो में डरने के बजाय धैर्य के साथ निर्णय लेने और साक्षात्कार का सामना करने के लिए प्रेरित होती है। हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के मन में सकारात्मकता और उत्साह का संचार होता है। हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति विशेष के गुणों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिल सकती है।
विज्ञापन विज्ञापन 4 में से 4 मंगलवार के उपाय - फोटो: अमर उजाला हनुमान चालीसा हनुमान चालीसा दोहा श्रीगुरु चरण सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दिखु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
जय हनुमान् ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुं लोक संपर्क।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन वरण विरज सुवेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।। हाथ बज्र औ ध्वजा बिजय।
काँधे मूँज जनेऊ साजै। शंकर सुवन केसरीनंद। तेज प्रताप महा जग वंदन।। विद्यावान गुणी अति चतुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लक्ष्मण सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियाहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।। लाय सजीवन लाखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। मम तुम भरत प्रियहि सम भाई।। सहस बदन तुम्म्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ समर्पण।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीषा।
नारद सारद सहित अहिसा।। जम कुबेर दिगपाल जहं ते। कवि कोड कहि सके कहा ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। तुम्म्हरो मंत्र विभीषण माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना।। जुग सहस्र योजना पर भानु। लील्यो ताहि फल मधुर जानु।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लंबी गई अचरज नहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सहज अनुग्रह तुम्हरे तेते।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसेरे।। सब सुख लहै विवाह सरना। तुम काहू को डरना।। आपन तेज सम्हारो आपै। त्रिलोक हांक तेन कांपै।।
भूत पिशाच निकट नहीं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।। संकट तेन हनुमान् सिद्धांतवै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।। सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा। और मनोरथ जो कोई लावै।
सोए अमित जीवन फल पावै।। चार युग प्रतापी गणराज्य। परमसिद्ध जगत उजियारा।। साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हारे पास। सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हारे भजन राम को भावै। जन्म-जन्म के दुःख बिसारवै।। अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरै। हनुमत सेई सर्व सुख करै।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जय जय जय हनुमान् गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई।। जो यह पढ़ें हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ स्थान।। दोहा पवनतनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप। राम लक्ष्मण सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
राम पूर्णिमा, 4 या 5 नवंबर कब है? पूजा शुभ अभिषेक और अन्य धार्मिक महत्व डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य ज्योतिष, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथ आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और वैधता की पुष्टि, संपूर्णता के लिए अमर उजाला वैध नहीं है।
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| Issuing Authority | Amar Ujala National Hindi |
|---|---|
| Topic Category | INDIA |
| Jurisdiction | All India / National |
| Publication Date | 2 November 2026 |