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पशुधन बीमा कराएं पशुपालक: 85% तक मिलेगी सब्सिडी, पशुओं की आकस्मिक मृत्यु-दिव्यांगता पर होगी नुकसान की भरपाई

Amar Ujala National HindiBy लखनऊ
31 Oct 2026
Original: English
AI Synopsis & Key Briefing

पशुधन बीमा कराएं पशुपालक: 85% तक मिलेगी सब्सिडी, पशुओं की आकस्मिक मृत्यु-दिव्यांगता पर होगी नुकसान की भरपाई

Key Highlights & Official Takeaways
  • ✓पशुधन बीमा कराएं पशुपालक: 85% तक मिलेगी सब्सिडी, पशुओं की आकस्मिक मृत्यु-दिव्यांगता पर होगी नुकसान की भरपाई
  • ✓पशु (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobestock Link Copied विज्ञापन गाय-भैंस समेत अन्य पशु ग्रामीण परिवारों की कमाई और आजीविका का अहम जरिया हैं।
  • ✓लेकिन पशुओं की अचानक मृत्यु होने पर पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
  • ✓इस नुकसान से राहत देने के लिए पशुधन बीमा आर्थिक सुरक्षा का विकल्प बन सकता है।
Comprehensive News & Policy Report

पशु (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobestock Link Copied विज्ञापन गाय-भैंस समेत अन्य पशु ग्रामीण परिवारों की कमाई और आजीविका का अहम जरिया हैं। लेकिन पशुओं की अचानक मृत्यु होने पर पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस नुकसान से राहत देने के लिए पशुधन बीमा आर्थिक सुरक्षा का विकल्प बन सकता है।

उत्तर प्रदेश सरकार पशुधन विकास परिषद के माध्यम से नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (NLM) के तहत मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना प्रदेश के सभी जिलों में चला रही है। पशुधन बीमा योजना की प्रमुख विशेषता यह है कि सरकार प्रीमियम पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है और लाभार्थी को केवल 15 प्रतिशत हिस्सा देना होगा।

इससे पशुओं का बीमा कराना अपेक्षाकृत किफायती हो सकता है। बीमित पशु की आकस्मिक मृत्यु या स्थाई दिव्यांगता की स्थिति में पशुपालक को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई इस योजना के तहत की जाती है। 1. पशुपालकों के पशु की मृत्यु होने की स्थिति में होने वाले नुकसान के सापेक्ष पशुधन बीमा से आर्थिक एवं पोषण सुरक्षा प्रदान की जाती है।

2. पशु की मृत्यु के बाद पारदर्शी प्रक्रिया से 21 दिन के भीतर दावे की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भुगतान करने की व्यवस्था है। 3. पशु को बेचे जाने की दशा में वैध अवधि के लिए 100 रुपये शुल्क देकर पशु बीमा का हस्तांतरण नवीन क्रेता के पक्ष में किया जा सकता है।

4. पशु की पूर्ण स्थाई दिव्यांगता (पीडीटी) के मामलों में बीमित राशि के 75 प्रतिशत तक के भुगतान का प्रावधान भी है। 5. सुरक्षित व पारदर्शी प्रक्रिया के तहत पशुपालक अपने बीमित पशु की पॉलिसी स्वतः मोबाइल पर लिंक से प्राप्त कर सकते हैं।

बीमा के लिए पशु का मूल्यांकन उसकी नस्ल, स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन की अवस्था, उत्पादकता, स्थानीय बाजार मूल्य, मौसम और दूसरे स्थानीय कारकों के आधार पर किया जाएगा। बीमित पशुओं की पहचान के लिए यूनिक टैग लगाया जाएगा। यह काम पशुपालन विभाग के पंजीकृत पशु चिकित्सक, पशुधन प्रसार अधिकारी, पशु चिकित्सा फार्मासिस्ट और कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता या मैत्री के माध्यम से किया जा सकता है।

योजना का लाभ लेने के इच्छुक पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय में संपर्क कर सकते हैं। वहां बीमा की पात्रता, पशु का मूल्यांकन, टैगिंग और आवेदन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली जा सकती है। बीमित पशु की पहचान यूनिक टैग नंबर से की जाएगी और उसकी जानकारी के आधार पर बीमा पॉलिसी मोबाइल लिंक के माध्यम से प्राप्त की जा सकेगी।

प्रीमियम पर सरकारी सब्सिडी के कारण यह सुविधा छोटे और सीमांत पशुपालकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है। पशुपालकों के लिए जरूरी है कि बीमा कराने से पहले पशु की उम्र, नस्ल और निर्धारित पात्रता की पुष्टि कर लें। साथ ही, बीमा पॉलिसी और टैग से संबंधित जानकारी सुरक्षित रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर दावा प्रक्रिया में परेशानी न हो।

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Official Notice Specification
Issuing AuthorityAmar Ujala National Hindi
Topic CategoryINDIA
JurisdictionAll India / National
Publication Date31 October 2026
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Active on SuchnaSetu
Official Source Attribution: Amar Ujala National Hindi
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