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National News Desk
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भांडुप दुर्घटना मामले में अदालत ने बस के ड्राइवर को जमानत दे दी

The Hindu NationalBy The Hindu National
4 Nov 2026
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AI Synopsis & Key Briefing

भांडुप दुर्घटना मामले में अदालत ने बस के ड्राइवर को जमानत दे दी

Key Highlights & Official Takeaways
  • ✓भांडुप दुर्घटना मामले में अदालत ने बस के ड्राइवर को जमानत दे दी
  • ✓अदालत ने कहा कि जमानत के चरण में बचाव पक्ष के तर्क में दम था: सावंत को बिजली से चलने वाली बस चलाने के लिए BEST के लिए आवश्यक प्रशिक्षण नहीं मिला होगा।
  • ✓न्यायमूर्ति श्याम चांडक ने जमानत देते हुए यह टिप्पणी की।
  • ✓अदालत ने उस पत्र पर ध्यान दिया जो BEST के एक डिपो प्रबंधक ने 7 जनवरी को पुलिस को भेजा था।
Comprehensive News & Policy Report

बॉम्बे हाई कोर्ट ने भांडुप स्टेशन दुर्घटना मामले में बेस्ट की बस के ड्राइवर संतोष सावंत को जमानत दे दी है, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और 12 लोग घायल हो गए थे। अदालत ने कहा कि जमानत के चरण में बचाव पक्ष के तर्क में दम था: सावंत को बिजली से चलने वाली बस चलाने के लिए BEST के लिए आवश्यक प्रशिक्षण नहीं मिला होगा।

न्यायमूर्ति श्याम चांडक ने जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने उस पत्र पर ध्यान दिया जो BEST के एक डिपो प्रबंधक ने 7 जनवरी को पुलिस को भेजा था। पत्र में कहा गया है कि उपक्रम के पास कोई प्रमाण पत्र नहीं है जो पुष्टि करता हो कि सावंत ने बिजली से चलने वाली बस चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया था या नहीं।

ट्रेनिंग लेने वाले ड्राइवरों की सूची में सावंत का नाम नहीं था. BEST ने सावंत को 1 दिसंबर, 2025 से रूट 606 पर बस संचालित करने का काम सौंपा, भले ही सावंत का नाम सूची में नहीं था। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि जब भांडुप रेलवे स्टेशन (पश्चिम) के पास बस नियंत्रण से बाहर हो गई तो सावंत ने तेजी से और बिना लापरवाही के बस चलाई।

बस ने बस स्टॉप के पास खड़े पैदल यात्रियों को टक्कर मार दी। सावंत के वकील देवेन्द्र पाटिल ने तर्क दिया कि बेस्ट ने सावंत को बिजली से चलने वाली बस चलाने का काम सौंपा था, हालांकि सावंत ने प्रशिक्षण नहीं लिया था। बचाव पक्ष ने कहा कि असाइनमेंट से इनकार करने पर अनुशासन नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती थी और नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता था।

यह अदालत के संज्ञान में लाया गया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि सावंत ने जानबूझकर बस को तेज गति से चलाया या सावंत शराब या नशीली दवाओं के प्रभाव में था। अदालत ने माना कि सावंत ने 2011 से BEST के साथ काम किया था और उनके पास किसी दुर्घटना का कोई रिकॉर्ड नहीं था।

अदालत ने यह भी कहा कि मुकदमा जल्द समाप्त नहीं हो सकता है और मामले में 56 गवाहों की सूची है। सत्र न्यायालय द्वारा सावंत की जमानत याचिका खारिज करने के बाद सावंत ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। सावंत की गिरफ्तारी के बाद से सावंत 11 महीने से जेल में हैं।

कोर्ट ने सावंत की दलील को स्वीकार कर लिया और उन्हें जमानत दे दी.

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Official Notice Specification
Issuing AuthorityThe Hindu National
Topic CategoryGOVERNANCE
JurisdictionAll India / National
Publication Date4 November 2026
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