Diwali 2026 Live: आज दिवाली पर इन शुभ योगों में करें मां लक्ष्मी की पूजा, जानें पूजन विधि और महत्व
Diwali 2026 Puja Muhurat Live Updates in Hindi:आज, देशभर में दीपावली का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन माता लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना का विशेष विधान है।
- ✓Diwali 2026 Puja Muhurat Live Updates in Hindi:आज, देशभर में दीपावली का पावन पर्व मनाया जा रहा है।
- ✓Diwali 2026 Lakshmi Puja Muhurat Live Updates - फोटो : अमर उजाला 7 1 Link Copied पूजा के स्थान की अच्छी तरह के साफ-सफाई करें।
- ✓फिर ईशान कोण में लकड़ी की चौकी रखें।
- ✓चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर अक्षत रखें और गणेश जी और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।
Diwali 2026 Lakshmi Puja Muhurat Live Updates - फोटो : अमर उजाला 7 1 Link Copied पूजा के स्थान की अच्छी तरह के साफ-सफाई करें। फिर ईशान कोण में लकड़ी की चौकी रखें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर अक्षत रखें और गणेश जी और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।
चौकी के पास तांबे या पीतल के कलश में शुद्ध जल और गंगाजल भरकर रखें और इसके अंदर एक सिक्का, सुपारी, अक्षत, रोली डाले। फिर कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर दिया रखें। इसके बाद हाथ में थोड़ा जल लेकर उसे अपने ऊपर और सभी पूजन सामग्री के ऊपर छिड़काव करें और ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ मंत्र का जाप करें। आचमन करने के बाद दाहिने हाथ में अक्षत, फल और जल लेकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी से सुख-समृद्धि की प्रार्थना और पूजा का संकल्प लें। दिवाली पूजा शुरू करने से पहले सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा करें, जिसमें उन्हें रोली, अक्षत, दूर्वा, मिठाई और धूप अर्पित करें।
मां लक्षमी की पूजा के दौरान शुद्ध देशी घी का एक चौमुखी दीपक और सरसों के तेल का छोटा दीया जलाएं। पूजा सामग्री और मंत्रों के जाप के बाद पहले भगवान गणेश की आरती और फिर मां लक्ष्मी की आरती करें। अंत में पूजा में हुई जाने-अनजाने में हुई भूल चूक के लिए क्षमा याचना मांगे।
उत्तर दिशा में पूजा- माना जाता है कि उत्तर दिशा धन की दिशा होती है और मां लक्ष्मी जिनकी पूजा दीवाली के दिन होती है, धन की देवी मानी गई हैं इसीलिए दीवाली की पूजा उत्तर दिशा या फिर उत्तर-पूर्व दिशा में ही करनी चाहिए। इसके मुताबिक पूजा करने वाले का मुख घर की उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए।
हर बार बदले मूर्तियां- हर साल दीवाली पूजन में इस्तेमाल की जाने वाली लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां नई होनी चाहिए। पुरानी मूर्तियों को इस्तेमाल में नहीं लाना चाहिए, लेकिन अगर आपके पास चांदी की मूर्तियां हैं तो दोबारा उन्हें गंगाजल से साफ करके इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
लाल रंग का इस्तेमाल - कहते हैं देवी को लाल रंग अति प्रिय होता है इसीलिए दीवाली की पूजा में लाल रंग की वस्तुओं का इस्तेमाल विशेष तौर से करना चाहिए, जैसे इस दिन पूजा के दौरान देवी को लाल रंग के कपड़े, लाल रंग के फूल, लाल श्रृंगार अर्पित करें।
इससे मां को प्रसन्न किया जा सकता है। रोली से बनाएं स्वास्तिक - पूजा घर में दोनों तरफ रोली से स्वास्तिक का निर्माण करना भी शुभ माना जाता है। कहते हैं स्वास्तिक भगवान गणेश का ही स्वरूप होता है। जो अत्यंत शुभ फल देने वाला माना गया है ,इससे घर में मौजूद तमाम तरह की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
मां लक्ष्मी ऐश्वर्य व वैभव की देवी हैं, इसीलिए दीपावली के दिन इनकी पूजा से भौतिक सुखों की प्राप्ति तो होती ही है साथ ही घर में भरपूर खुशियां आती हैं। वहीं दीवाली पूजन में अगर कुछ बातों का भी खास ध्यान रखा जाए तो विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है ।
धार्मिक मान्यताओं में आम के पेड़ को दैवीय वृक्ष माना जाता है और आम के पेड़ की लकड़ी और पत्तों का प्रयोग सभी प्रकार के धार्मिक कार्यों की शुरुआत करने से पहले किया जाता है। दीपावली पर भी आपको घर के मुख्य द्वार और पूजाघर के मुख्य द्वार पर गेंदे के फूल और आम के पत्तों से बना तोरण लगाना चाहिए।
ऐसा करना धार्मिक दृष्टि तो शुभ माना ही जाता है, बल्कि वास्तु के अनुसार भी यह सकारात्मक उर्जा को आकर्षित करता है। धर्म से जुड़े कोई भी शुभ कार्य आरंभ करने से पहले स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाया जाता है। इसका महत्व बहुत खास माना जाता है।
दीपावली के दिन पूजाघर की दीवारों पर सिंदूर से स्वास्तिक चिह्न बनाएं इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह देवी लक्ष्मी को आकर्षित करता है और घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है। दीपावली 2026: दिवाली पर आज कब है लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त ?
जानिए संपूर्ण पूजा विधि और नियम दिवाली पर प्रदोष काल और स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन का महत्व हर वर्ष कार्तिक अमावस्या पर देवी लक्ष्मी की पूजा का महत्व होता है। इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, देवी सरस्वती और भगवान कुबेर की पूजा होती है।
शास्त्रों में दिवाली पर लक्ष्मी पूजन अमावस्या तिथि और प्रदोष काल में सबसे उपयुक्त और शुभ मानी जाती है। प्रदोष काल और स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करने से माता जल्दी प्रसन्न होती हैं और अंश रूप में वास करने लगती हैं।
इससे अलावा दिवाली पर महानिशिता काल में लक्ष्मी पूजन का महत्व है।
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| Issuing Authority | Amar Ujala National Hindi |
|---|---|
| Topic Category | INDIA |
| Jurisdiction | All India / National |
| Publication Date | 7 November 2026 |