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National News Desk
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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व टी.एन. को कोई राहत नहीं दी कैश-फॉर-जॉब घोटाला मामले में मंत्री नेहरू

The Hindu NationalBy The Hindu National
2 Nov 2026
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पीठ ने हालांकि कहा कि पूर्व मंत्री अदालत के समक्ष भविष्य की कार्यवाही के दौरान अपने बचाव में और कानून के अनुसार सभी बिंदु उठाने के हकदार हैं

Key Highlights & Official Takeaways
  • ✓पीठ ने हालांकि कहा कि पूर्व मंत्री अदालत के समक्ष भविष्य की कार्यवाही के दौरान अपने बचाव में और कानून के अनुसार सभी बिंदु उठाने के हकदार हैं
  • ✓के खिलाफ करोड़ों रुपये के नकद-फॉर-नौकरी घोटाले के आरोपों की जांच करने की हरी झंडी दी गई थी।
  • ✓पीठ ने हालांकि कहा कि पूर्व मंत्री अदालत के समक्ष भविष्य की कार्यवाही के दौरान अपने बचाव में और कानून के अनुसार सभी बिंदु उठाने के हकदार हैं।
  • ✓ईडी ने अप्रैल 2025 में श्री नेहरू के भाई एन.
Comprehensive News & Policy Report

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 नवंबर, 2026) को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) को प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने और पूर्व द्रमुक मंत्री के.एन.

के खिलाफ करोड़ों रुपये के नकद-फॉर-नौकरी घोटाले के आरोपों की जांच करने की हरी झंडी दी गई थी। नेहरू. न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि गहन जांच आवश्यक है क्योंकि श्री नेहरू कथित भर्ती अनियमितताओं में शामिल होने के कारण मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे थे।

पीठ ने हालांकि कहा कि पूर्व मंत्री अदालत के समक्ष भविष्य की कार्यवाही के दौरान अपने बचाव में और कानून के अनुसार सभी बिंदु उठाने के हकदार हैं। उच्च न्यायालय ने पहले अपने 20 फरवरी के आदेश पर फिर से विचार करने की मंत्री की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें डीवीएसी को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

पिछले साल अक्टूबर में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तमिलनाडु पुलिस के साथ तत्कालीन श्री नेहरू के नेतृत्व वाले नगर प्रशासन और जल आपूर्ति (एमएडब्ल्यूएस) विभाग में नौकरियों के लिए नकद का आरोप लगाते हुए एक डोजियर साझा किया था।

ईडी ने अप्रैल 2025 में श्री नेहरू के भाई एन. रविचंद्रन से जुड़े परिसरों पर एक बैंक धोखाधड़ी मामले में तलाशी और जब्ती अभियान चलाते हुए आपत्तिजनक सामग्रियों पर अपना हाथ रखा था। इसने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 66 के अनुसार डीजीपी के साथ जानकारी साझा की थी।

सामग्री में कथित तौर पर एमएडब्ल्यूएस विभाग में सहायक इंजीनियरों, जूनियर इंजीनियरों और टाउन प्लानिंग अधिकारियों के 2,538 पदों को भरने के लिए हवाला लेनदेन के माध्यम से कई करोड़ रुपये के आदान-प्रदान का खुलासा हुआ था। उन्होंने प्रति व्यक्ति ₹25 लाख से ₹35 लाख की रिश्वत राशि प्राप्त करने और उन लोगों के आधिकारिक रूप से चयनित और नियुक्त होने से पहले ही उम्मीदवारों के साथ कॉल लेटर साझा करने का खुलासा किया।

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Official Notice Specification
Issuing AuthorityThe Hindu National
Topic CategoryGOVERNANCE
JurisdictionAll India / National
Publication Date2 November 2026
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